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भारत में कृषि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने की शैली है। हमारे देश की आधी से अधिक आबादी आज भी खेती पर निर्भर है। ऐसे में जब प्रकृति रौद्र रूप धारण करती है — कभी बेमौसम बारिश, कभी ओलावृष्टि, तो कभी अप्रत्याशित सूखा — तो किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों मिट्टी में मिल जाती है। यह स्थिति न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा आघात करती है, बल्कि उनके मनोबल को भी तोड़ देती है। वर्ष 2025 में, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए, ऐसी आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि की आशंका है। ऐसे मुश्किल समय में किसानों को सहारा देने और उनकी मेहनत को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है — प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत साल 2016 में हुई थी। इसका मुख्य मकसद किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई देना और उनकी आय को स्थिर बनाना है। यह योजना एक तरह का सुरक्षा कवच है, जो किसान के खेत में फसल खराब होने की स्थिति में उसे आर्थिक रूप से टूटने से बचाती है। यह न केवल वर्तमान नुकसान की भरपाई करती है, बल्कि किसानों को भविष्य के लिए भी आश्वस्त करती है, जिससे वे बिना किसी डर के नए कृषि प्रयोग और तकनीक अपना सकें।
योजना का नाम | प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) |
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किसने शुरू किया | भारत सरकार |
उद्देश्य क्या है | प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान की भरपाई और किसानों की आय को स्थिर करना |
शुरुआत कब हुई | 13 जनवरी, 2016 |
Official Website | pmfby.gov.in |
PMFBY के तहत, किसानों को खरीफ फसलों के लिए बीमा राशि का 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए 5% प्रीमियम देना होता है। बाकी प्रीमियम सरकार द्वारा दिया जाता है।
उदाहरण के लिए, रमेश जी ने अपनी एक एकड़ ज़मीन पर धान की फसल बोई है। उन्होंने PMFBY के तहत अपनी फसल का बीमा करवाया, जिसके लिए उन्हें केवल 2% प्रीमियम देना पड़ा। अगर उनकी फसल किसी प्राकृतिक आपदा से खराब हो जाती है, तो उन्हें बीमा कंपनी से मुआवजा मिलेगा, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान नहीं होगा।
PMFBY की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों को महज 1.5% से 5% तक का बहुत कम प्रीमियम देना होता है। बाकी प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं, जो बीमा लागत का एक बड़ा हिस्सा होता है। उदाहरण के लिए, यदि खरीफ फसल का बीमा 10,000 रुपये का है, तो किसान को अधिकतम 2% यानी 200 रुपये का प्रीमियम देना होगा, जबकि शेष 9,800 रुपये सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। यह सुविधा मात्र एक रुपये में फसल बीमा जैसी पहल से और भी सुलभ हो गई है, जिससे बीमा की लागत बेहद कम हो जाती है, और छोटे से छोटे किसान भी इसका लाभ उठा सकते हैं।
कुछ विशेष इलाकों जैसे पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में सरकार 100% प्रीमियम खुद वहन करती है। यानी वहां के किसानों को बीमा के लिए एक भी रुपया नहीं देना पड़ता, फिर भी पूरी सुरक्षा मिलती है। यह किसानों को वित्तीय जोखिम से मुक्ति दिलाकर उन्हें सशक्त बनाता है, जिससे वे अपनी खेती को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकें और आकस्मिक वित्तीय संकट से बच सकें। इस योजना के तहत, अब किसानों के लिए ‘सरल फसल बीमा’ नाम से एक नई सुविधा शुरू की गई है, जिससे पॉलिसी को समझना और भी आसान हो गया है। 2025 तक, इस योजना के तहत प्रीमियम सब्सिडी को और अधिक लक्षित और कुशल बनाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक किसान, विशेष रूप से कमजोर और सीमांत किसान, इसका लाभ उठा सकें। इसके लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी प्रणालियों के साथ एकीकरण की भी योजना है, ताकि सब्सिडी का लाभ सीधे और तुरंत किसानों तक पहुंचे। यह वित्तीय स्थिरता किसानों को कृषि में निवेश करने और जोखिम लेने का प्रोत्साहन देती है, जिससे उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
चाहे बेमौसम बारिश हो, बाढ़, सूखा, कीट प्रकोप, स्थानीयकृत आपदाएं जैसे भूस्खलन, या तूफान — यह योजना हर तरह की अधिसूचित आपदा में किसानों को राहत देती है। हाल के दिनों में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की खड़ी फसलें तबाह हो गईं। लेकिन जिन किसानों ने PMFBY में समय पर आवेदन किया था, उन्हें अब मुआवजा मिलने की उम्मीद है। यह योजना बेमौसम बारिश और नुकसान से सुरक्षा प्रदान करती है। 2025 तक, जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाले नए जोखिमों, जैसे अत्यधिक तापमान, लंबी गर्मी की लहरें या नए प्रकार के कीट प्रकोप, को भी योजना के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि किसानों को इन अप्रत्याशित चुनौतियों से भी बचाया जा सके। इसका लक्ष्य किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक लचीला बनाना है।
इस योजना के तहत, अगर किसी किसान की फसल कटाई के 14 दिनों के भीतर खेत में सूखने के लिए रखी गई हो और उस दौरान बेमौसम बारिश या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा से नुकसान होता है, तो भी किसान मुआवजे का हकदार होता है। यह किसानों को एक अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है, खासकर जब मौसम अप्रत्याशित रूप से बदलता है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ता है कि उनकी मेहनत किसी भी हाल में बेकार नहीं जाएगी और उन्हें अनपेक्षित नुकसान से राहत मिलेगी। अब, PMFBY के अंतर्गत ‘मध्य मौसम प्रतिकूलता’ नामक एक नया घटक जोड़ा गया है, जो किसानों को फसल के बीच में आने वाली मुश्किलों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में अत्यधिक बारिश के कारण फसल खराब हो जाती है, तो किसान इस घटक के तहत भी मुआवजा पा सकते हैं।
PMFBY की प्रक्रिया को डिजिटल और तेज़ बनाया गया है। अब नुकसान का आकलन ड्रोन, सेटेलाइट डेटा और मोबाइल ऐप जैसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके किया जाता है, जिससे नुकसान की सही जानकारी मिलती है और मुआवजा समय पर पहुंचता है। आमतौर पर नुकसान होने के 72 घंटों के भीतर किसान को इसकी सूचना बीमा कंपनी या कृषि विभाग को देनी होती है, और दावा प्रस्तुत करने के 60 दिनों के भीतर क्लेम का निपटान हो जाता है। 2025 तक, ‘मेरी पॉलिसी, मेरे हाथ’ जैसे अभियानों के माध्यम से किसानों तक सीधे उनकी पॉलिसी दस्तावेज पहुँचाने और दावा प्रक्रिया को और भी पारदर्शी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि दावों का निपटान और भी तेज़ी से हो, संभवतः 30 दिनों के भीतर, जिससे किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता मिल सके और वे अगले फसल चक्र के लिए तैयारी कर सकें।
किसान इस योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर जा सकते हैं या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, PMFBY App के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया और भी आसान हो गई है।
किसान इस योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन पोर्टल https://pmfby.gov.in पर जाकर खुद आवेदन कर सकते हैं। जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), बैंक या कृषि अधिकारी के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन सिस्टम से किसानों को प्रीमियम, फसल का कवरेज, आवेदन की स्थिति और दावा निपटान जैसी जानकारी भी मिलती रहती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है। यह किसानों को अपनी बीमा स्थिति पर नजर रखने में मदद करता है, और 2025 तक, ‘किसान सुविधा’ जैसे मोबाइल ऐप के माध्यम से यह जानकारी और भी आसानी से उपलब्ध होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। अब, किसान कृषि मंत्रालय के नये डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘किसान-ई’ (Kisan-e) का उपयोग करके भी PMFBY के लिए आवेदन कर सकते हैं और अपनी पॉलिसी का प्रबंधन कर सकते हैं।
PMFBY तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देती है, जैसे कि फसल कटाई प्रयोगों (CCE) को करने के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे फसल के नुकसान का आकलन अधिक सटीक होता है और किसानों को सही मुआवजा मिलता है।
यहाँ कुछ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) दिए गए हैं:
प्रश्न: PMFBY के तहत कौन सी फसलें कवर की जाती हैं?
उत्तर: इस योजना के तहत खाद्यान्न, तिलहन, वाणिज्यिक और बागवानी फसलें कवर की जाती हैं।
प्रश्न: मुआवजे का दावा करने की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: फसल के नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी या कृषि विभाग को दें।
प्रश्न: क्या गैर-ऋणी किसान भी इस योजना में शामिल हो सकते हैं?
उत्तर: हाँ, गैर-ऋणी किसान भी अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं।
PMFBY किसानों के लिए एक वरदान है, जो उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाता है। अब किसान बिना किसी डर के अपनी खेती पर ध्यान दे सकते हैं और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान कर सकते हैं। इस योजना के माध्यम से, किसान सशक्त और आत्मनिर्भर बन रहे हैं। यह किसानों के लिए सुरक्षा कवच के समान है।
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