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भारत में खेती का एक बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर है। खरीफ की फसलें जैसे धान, मक्का, बाजरा, उड़द, मूंग आदि बारिश के समय बोई जाती हैं। लेकिन अगर बारिश शुरू होने से पहले कुछ जरूरी तैयारियाँ नहीं की गईं, तो फसल में नुकसान हो सकता है। यह तैयारी सिर्फ खेत की जुताई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मिट्टी की सेहत, बीज का चुनाव, जल प्रबंधन और संभावित कीट-रोगों से बचाव जैसे कई पहलू शामिल हैं। आधुनिक कृषि में, खेती के आधुनिक तरीके जैसे ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेंसर-आधारित सिंचाई और एआई-संचालित मौसम पूर्वानुमान का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे किसानों को अधिक सटीक निर्णय लेने में मदद मिलती है।
उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र के किसान राजू पाटिल ने 2025 में प्री-मानसून तैयारी के लिए ‘मिट्टी परीक्षण अभियान’ के तहत अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण करवाया, जिससे उन्हें पता चला कि मिट्टी में जिंक की कमी है। उन्होंने तुरंत कृषि विभाग से सलाह ली और जिंक सल्फेट का उपयोग करके अपनी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई।
योजना का नाम | प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) |
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किसने शुरू किया | भारत सरकार (कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय) |
उद्देश्य क्या है | 2025 में इसमें ड्रोन-आधारित क्षति आकलन जोड़ा गया है, जिससे किसानों को 48 घंटे के भीतर दावा राशि मिल सके |
शुरुआत कब हुई | 18 फरवरी 2016 (2025 तक 9 करोड़ किसान लाभान्वित) |
Official Website | pmfby.gov.in |
1. डिजिटल टूल्स के साथ खेत की तैयारी
आजकल स्मार्ट फार्मिंग ऐप्स जैसे ‘कृषि साथी’ और ‘फसल विज्ञान’ से मिट्टी की गुणवत्ता, उर्वरक आवश्यकता और बुवाई का सही समय जाना जा सकता है। गहरी जुताई के लिए अब ऑटो-गाइडेड ट्रैक्टर भी उपलब्ध हैं जो GPS से 2 सेमी की सटीकता से काम करते हैं।
छोटे किसान मानसून पूर्व तैयारी के लिए सामुदायिक कृषि उपकरण बैंक की सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं। 2025 में, कई किसान ‘फार्म-मित्र’ एप का उपयोग कर रहे हैं, जो उन्हें आस-पास के किसानों से किराए पर उपकरण लेने में मदद करता है। इस ऐप के ज़रिये वे आधुनिक तकनीक से लैस मशीनें जैसे स्वचालित बीज ड्रिल और स्प्रेयर भी किराए पर ले सकते हैं, जो उनकी उत्पादकता को काफी बढ़ाती हैं।
2. जैविक खेती का बढ़ता प्रभाव
2025 तक जैविक उत्पादों की मांग 40% बढ़ी है। नीम-आधारित कीटनाशकों के साथ-साथ अब नैनो बायो-स्टिमुलेंट्स भी उपलब्ध हैं जो पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
केरल के एक प्रगतिशील किसान ने तो बारिश के पानी को फिल्टर करके जैविक खेती में उपयोग करने की अनोखी तकनीक विकसित की है। किसान अब बारिश से फसलों को बचाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल करके जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। जैविक खाद और कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार आ रहा है। वास्तव में, 2025 में, विशेषज्ञ जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को बारिश के पानी के संचयन और पुन: उपयोग के बारे में सलाह दे रहे हैं। इससे न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि यह मिट्टी में पोषक तत्वों को बनाए रखने में भी मदद करता है।
3. मौसम पूर्वानुमान की नई तकनीकें
भारतीय मौसम विभाग अब ब्लॉक-लेवल पर 3 दिन का सटीक पूर्वानुमान दे रहा है। AI आधारित ऐप्स जैसे ‘मेघदूत 2.0’ किसानों को वास्तविक समय में अलर्ट भेजते हैं।
राजस्थान के एक किसान ने बताया कि इन टूल्स से उन्होंने पिछले सीजन में 20% अधिक उत्पादन प्राप्त किया। यह बारिश से पहले के कृषि कार्य आसानी से करने में मदद करते हैं । किसान महेश बताते हैं कि कैसे उन्हें ‘मेघदूत 2.0’ ऐप से पता चला कि अगले सप्ताह भारी बारिश होने वाली है, जिसके कारण उन्होंने अपनी फसल को समय से पहले काट लिया, जिससे उन्हें नुकसान से बचाया जा सका।
4. सरकारी योजनाओं का लाभ
कृषि मंत्रालय की ‘डिजिटल कृषि मिशन’ के तहत 2025 तक 50 लाख किसानों को मुफ्त सॉइल टेस्टिंग किट वितरित की गई हैं।
पहली बारिश के बाद के उपाय अब KVK के YouTube चैनल पर लाइव डेमो के साथ सिखाए जाते हैं। ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ योजना के तहत, किसानों को कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक तकनीक और उन्नत बीज खरीद सकें। इसके अतिरिक्त, सरकार ‘हर खेत को पानी’ योजना के अंतर्गत सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सब्सिडी भी प्रदान कर रही है। 2025 में, इस योजना के तहत, कई किसानों ने अपने खेतों में सोलर पंप लगाए हैं जिससे उन्हें सिंचाई में काफी मदद मिली है।
5. अतिरिक्त सुझाव (Quick Tips 2025)
- ड्रोन स्प्रेयर: 1 एकड़ में सिर्फ 10 मिनट में कीटनाशक छिड़काव
- सोलर पंप: 80% सब्सिडी पर उपलब्ध
- फसल चक्र ऐप: स्थानीय मंडी मांग के अनुसार फसल चयन
2025 में किसान नई तकनीकों को अपनाकर और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी फसलों को सुरक्षित और उत्पादक बना सकते हैं। आधुनिक तकनीकों और ज्ञान का सही इस्तेमाल करके, किसान न केवल अपनी उपज बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q: 2025 में खरीफ फसलों के लिए सबसे अच्छी किस्में कौन सी हैं?
एमआईटी रिसर्च के अनुसार, धान की ‘पूसा 1886’ और दालों की ‘आईपीएम 205’ जैविक एवं जलवायु-सहनशील किस्में उत्कृष्ट परिणाम दे रही हैं।
Q: 2025 में मिट्टी की उर्वरता जांचने का सबसे आसान तरीका क्या है?
अब कई मोबाइल ऐप्स उपलब्ध हैं जो मिट्टी के रंग और बनावट के आधार पर उर्वरता का अनुमान लगा सकते हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा संचालित मिट्टी परीक्षण केंद्र भी मुफ्त सेवाएं प्रदान करते हैं। इनमें से ‘भूमि-मित्र’ ऐप किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है, जो मिट्टी के नमूनों के विश्लेषण के लिए नजदीकी परीक्षण केंद्र ढूंढने में मदद करता है।
Q: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत दावा कैसे करें?
PMFBY के तहत, आप फसल के नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर PMFBY ऐप या अपने स्थानीय कृषि विभाग को दे सकते हैं। ड्रोन-आधारित मूल्यांकन के कारण, अब दावा राशि 48 घंटे के भीतर सीधे आपके बैंक खाते में जमा हो जाती है। 2025 में, PMFBY ने एक नई सुविधा शुरू की है जिसके तहत किसान अपनी फसल की तस्वीरें और वीडियो अपलोड करके भी दावा कर सकते हैं।
Q: 2025 में खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
खरपतवार नियंत्रण के लिए, किसान अब रोबोटिक वीडर्स का उपयोग कर रहे हैं जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के खरपतवारों को हटा सकते हैं। ये रोबोट AI और Machine Learning का उपयोग करके खरपतवारों की पहचान करते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं।
Q: क्या 2025 में जल संरक्षण के लिए कोई नई तकनीकें उपलब्ध हैं?
हाँ, 2025 में, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। यह प्रणाली मिट्टी की नमी के स्तर और मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर स्वचालित रूप से सिंचाई करती है, जिससे पानी की काफी बचत होती है। इसके अतिरिक्त, किसान अब ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई का भी उपयोग कर रहे हैं जो जल संरक्षण के लिए बहुत प्रभावी हैं।
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